शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

जीवन-नौका


देख रहा हूँ मैं,
खुद को वक़्त की धारा में ,
बहते हुए नौका पर सवार,
बिन पतवार के,
बिना किसी सुरक्षा कवच के ।


देख रहा हूँ मैं,
काल-क्रम की फेनिल लहरें ,
दैत्याकार हो मुझे ग्रसना चाह रही है,
हाँ, उसी नौका को ,
जिसमे सवार हूँ मैं ।


देख रहा हूँ मैं,
जीवन नौका को डूबते उतराते ,
चक्रवाती तूफानों से नित्य टकराते ,
अवरोधों से विरत बहते हुए ,
हाँ,उसी नौका को,जिसमे सवार हूँ मैं ।


-कभी-कभी जिंदगी कितनी बोझिल हो जाती है न ! और तब निराशा के पल
में लगता है जीना कितना मुश्किल है फिर भी हमें आगे बढ़ना होता है........

रोहित ~~जिंदगी की किताब से....







23 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari ने कहा…

निराशा के पल भी लहरों के मानिंद आते हैं, लौट जाते हैं. बस आगे बढ़ते रहें, यही जीवन है.

shikha varshney ने कहा…

isi ka naam to jeewan hai.....raat ki subha hoti hai bas vaqt ke saath chalte rahe. achhci rachna

Dr. RAMJI GIRI ने कहा…

अच्छा लिखा है आपने,बंधु..

amrendra ने कहा…

गर्मिए हसरत ऐ नाकाम से जल जाते है, हम चिरागों की तरह शाम से जल जाते है, शमा जलती है जिस आग में नुमयिस के लिए, हम उसी आग में गुमनाम से जल जाते है, जब भी आता है मेरा नाम उसके नाम के साथ, जाने क्यों लोग मेरे नाम से जल जाते है......

amrendra ने कहा…

धूल के कण रक्त से धोए गए हैं,
विश्व के संताप सब ढोए गए हैं।
पांव के बल मत चलो अपमान होगा,
सिर शहीदों के यहां बोए गए हैं।

ऐ मेरे वतन के लोगों
तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का
लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर
वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो -२
जो लौट के घर न आये -२
ऐ मेरे वतन के लोगों
ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुरबानी
जब घायल हुआ हिमालय
खतरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो
फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा
सो गये अमर बलिदानी
जो शहीद...
जब देश में थी दीवाली
वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में
वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो आपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद.

कोई सिख कोई जाट मराठा
कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला
हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वअत पर
वो खून था हिंदुस्तानी
जो शहीद.

थी खून से लथ-पथ काया
फिर भी बन्दूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा
फिर गिर गये होश गँवा के
जब अन्त-समय आया तो
कह गये के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों
अब हम तो सफ़र करते हैं
क्या लोग थे वो दीवाने
क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो क़ुरबानी..

AAP KA - Amrendra

amrendra ने कहा…

REAL FACES OF INDIAN MEDIA

There are several major publishing groups in India , the most prominent among them being the Times of India Group,the Indian Express Group, the Hindustan Times Group, The Hindu group, the Anandabazar Patrika Group, the Eenadu Group, the Malayalam Manorama Group, the Mathrubhumi group, the Sahara group, the Bhaskar group,and the Dainik Jagran group.

Let us see the ownership of different media agencies.

NDTV : A very popular TV news media is funded by Gospels of Charity in Spain. Supports Communism. Recently it has developed a soft corner towards Pakistan because Pakistan President has allowed only this channel to be aired in Pakistan. Indian CEO Prannoy Roy is co-brother of Prakash Karat, General Secretary of the Communist party of India. His wife and Brinda Karat are sisters.

India Today : which used to be the only national weekly who supported BJP is now bought by NDTV!! Since then the tone has changed drastically and turned into Hindu bashing.

CNN-IBN: This is 100 percent funded by Southern Baptist Church with its branches in all over the world with HQ in US. The Church annually allocates $800 million for promotion of its channel. Its Indian head is Rajdeep Sardesai and his wife Sagarika Ghosh.

Times group list: Times Of India, Mid-Day, Nav-Bharth Times, Stardust , Femina, VijayaTimes, Vijaya Karnataka, Times now (24- hour news channel) and many more.. Times Group is owned by Bennet & Coleman. 'World Christian Council' does 80 percent of the Funding, and an Englishman and an Italian equally share balance 20 percent. The Italian Robertio Mindo is a close relative of Sonia Gandhi.

Star TV : It is run by an Australian, who is supported by St. Peters Pontificial Church Melbourne.

Hindustan Times: Owned by Birla Group, but hands have changed since Shobana Bhartiya took over. Presently it is working in Collobration with Times Group.

The Hindu :English daily, started over 125 years has been recently taken over by Joshua Society, Berne, Switzerland. N.Ram's wife is a Swiss national.

Indian Express : Divided into two groups. The Indian Express and new Indian Express (southern edition). ACTS Christian Ministries have major stake in the Indian Express and latter is still with the Indian counterpart. .

Eeenadu: Still to date controlled by an Indian named Ramoji Rao. Ramoji Rao is connected with film industry and owns a huge studio in Andhra Pradesh.

Andhra Jyothi : The Muslim party of Hyderabad known as MIM along with a Congress Minister has purchased this Telugu daily very recently.

The Statesman : It is controlled by Communist Party of India.

Kairali TV : It is controlled by Communist party of India (Marxist)

Mathrubhoomi : Leaders of Muslim League and Communist leaders have major investment.

Asian Ageand Deccan Chronicle : Is owned by a Saudi Arabian Company with its Chief Editor M.J. Akbar.

Gujrat riots which took place in 2002 where Hindus were burnt alive, Rajdeep Sardesai and Bharkha Dutt working for Star TV at that time got around $5m from Saudi Arabia to cover only Muslim victims which they did very faithfully. Not a single Hindu family was interviewed or shown on TV whose near and dear ones had been burnt alive.

It is reported Tarun Tejpal of <Tehelka..com regularly gets flat check from Arab countries to target BJP and Hindus only, it is said. The ownership explains the control of media in India by foreigners. The result is obvious.

PONDER OVER THIS. NOW YOU KNOW WHY EVERY ONE IS AGAINST TRUTH, HOW VERY SAD.

Please pass this on to as many as possible. Let them know who feeds them with biased news and information- yet call themselves secular.

Thanks & Regards,

Amrendra Mishra

amrendra ने कहा…

विश्वास ही बल है। अपने उद्देश्य में पूर्ण आस्था रखने वाले के लिए संसार में कुछ भी असंभव नहीं है। विश्वास में एक मूक बल है, यही माना जाता है और यही होता भी है। जिसे अपने व्यक्तित्व में विश्वास है, अपनी शक्ति में विश्वास है, अपनी सफलता में विश्वास है, अपने चरित्र पर विश्वास है, अपनी साधना पर विश्वास है, वही आत्मबली है। जीवन के प्रति आस्था, सेवा के प्रति आस्था, मानवता के प्रति आस्था, शील व सद्व्यवहार के प्रति आस्था होने पर ही हम उदार, सहनशील और चरित्रवान हो सकते है। आस्था ही सच्चरित्रता की नींव है। मनुष्य महान है और ऊंचाई की ओर जाकर आदर्श प्राप्ति की ओर जाना चाहता है। इसी प्रकार की आस्था हम सब में होनी चाहिए, तभी हम मनुष्य के साथ मानवता का व्यवहार कर सकते है और प्रत्येक व्यक्ति को समान समझ सकते है।

शिक्षक में छात्र को ज्ञानवान बनाने में आस्था हो, मशीनमैन को मशीन ठीक करने में आस्था हो तभी सच्चाई और परिश्रम दिखाई देता है। जो भी हम कर्तव्य, लक्ष्य या प्रयोग निश्चित करे उसे भगवान की तरह पवित्र मानें। लक्ष्य के प्रति आस्थावान बनें, तभी हमारे सामने कोई भी मुसीबत टिक नहीं पाएगी। ज्ञान की खोज बिना सच्ची आस्था के, अटूट विश्वास के तथा सच्ची लगन के संभव नहीं है। सत्य का खोजी वज्र की तरह दृढ़ होता है। सुख मनुष्य को विश्वास से ही मिलता है। तर्क थोड़ी दूर तक ले जा सकता है, लेकिन कर्मठता और दृढ़ता के लिए ध्येय में विश्वास जरूरी है। इसीलिए महापुरुषों व संतों, ज्ञानियों ने कहा है-जहां आस्था है, विश्वास है और लगन है, वहीं शक्ति है और जहां शक्ति है वहां सफलता निश्चित है। मनुष्य की सफलता वस्तु या धन संग्रह में नहीं है। सफलता है संकल्प-शक्ति की दृढ़ता में, मनुष्य की कर्मठता में एवं उनकी लगन या कार्य-तत्परता में। मनुष्य का चरित्र ही उसकी सफलता है। जो लोग कहते है विश्वास आस्था और लगन में सफलता है यह सच ही नहीं महा सच है, लेकिन इसके पीछे कर्म है। अच्छे कर्म का अच्छा और बुरे कर्म का बुरा। यही कर्मफल सफलता है। कर्म से ही उसका उत्कर्ष होता है और अन्य कोई गुण इतना फलप्रद नहीं होता है जितना कर्म होता है।

Amrendra Mishra

Avinash Chandra ने कहा…

achchhi lagi...sundar bhaav, badhiyaa shaili

anupam mishra ने कहा…

वाह पथ पथिक परीक्षा क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों, नाविक की धैर्य परीक्षा क्या, यदि धाराएं प्रतिकूल न हों।

Kavi Kulwant ने कहा…

bahut sundar.. bahut khoob...

sakhi with feelings ने कहा…

acha likha hai apne..badhayee

shama ने कहा…

Bahut sundar rachna aur utnahi sundar chitr!

kshama ने कहा…

Anek shubhkamnayen aur snehil swagat!

निर्मला कपिला ने कहा…

यहीम से तो जीवन शुरू होता है जो साहस से चलता रहता है वही पार उतरता है शुभकामनायें

शशांक शुक्ला ने कहा…

हर हार के बाद एक बार फिर खडें होकर भिड़ जाना चाहिये यहीं सफलता कि पहली सीढी है

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } ने कहा…

हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,

अजय कुमार ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें

amrendra ने कहा…

कुछ लाइन आप लोगो के लिए

उत्तरा प्रदेश का एक लड़का
खिला एक फूल फिर इन मैदानों में
मुरझाने फिर चला मुंबई की गलियों में
graduate की डिग्री हाथ में थामे निकल गया
फिर उत्तर प्रदेश का एक लड़का जिंदा लांश बन गया

खो गया इस भागती भीड़ में वो
रोज़ मारा बस के धक्कों में वो
दिन है या रात वो भूल गया
फिर उत्तर प्रदेश का एक लड़का जिंदा लांश बन गया

देर से रात घर आता है पर कोई टोकता नहीं
भूख लगती है उसे पर माँ अब आवाज लगाती नहीं
कितने दिन केवल वडा पाँव खाया और चाय पीकर वो सोता गया
फिर उत्तर प्रदेश का एक लड़का जिंदा लांश बन गया

अब साल में चार दिन घर जाता है वो
सारी खुशियाँ घर से समेट लाता है वो
अपने घर में अब वो मेहमान बन गया
फिर उत्तर प्रदेश का एक लड़का जिंदा लांश बन गया
मिलजाए कोई गाँव का तो हँसे लेता है वो
पूरी अनजानी भीड़ में उसे अपना लगता है वो
भोजपुरी गाने सुने तो उदास होता गया
फिर उत्तर प्रदेश का एक लड़का जिंदा लांश बन गया
न जाने कितने फूल पहाड के यूँ ही मुरझाते हैं
नौकरी के बाज़ार में वो बिक जाते है
रोते हैं माली रोता है चमन
उत्तरप्रदेश का फूल उत्तरप्रदेश में महकेगा की नहीं
Amrendra Mishra

ρяєєтι ने कहा…

इस् जीवन का यही है रंगरूप,
थोड़ी थोड़ी ख़ुशी और थोडा थोडा गम,
पर चलते जाना है मुसाफिर का क्रम ...

जीवन के यथार्थ की सुन्दर अभिव्यक्ति ...

परमजीत बाली ने कहा…

अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं।सुन्दर रचना है।

sangeeta swarup ने कहा…

जिंदगी की किताब से मंथन कर सत्य को निकाला है....सुन्दर अभिव्यक्ति

बेचैन आत्मा ने कहा…

जब पतवार डाल दिया और खुद को धारा के हवाले कर दिया तो 'खुद' कहाँ शेष रह गया...?

संजय भास्कर ने कहा…

ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

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