सोमवार, 24 मार्च 2014

शेष !!!

चित्र:गूगल से साभार 

लाख चाहता हूँ ,
शब्दो से तुम्हे, 
पूरा का पूरा,
समेट लूँ। 


वही नैन-नक्श ,
प्यारी सी मुस्कान ,
शब्द भी  चुन लूँ ऐसे,
जो बया कर जाय तेरा ही अक्स। 


तुम्हारी मासूमियत ,
तुम्हारा बावलापन ,
लाख चाहूँ कुछ लिख जाऊँ  ऐसा ,
कि हो सके तुम्हारी इबादत। 


जितना भी चाहूँ तुम्हे शब्दों में समेटना,
ऐसा ही कहाँ हो पाता है,
थोड़ा नहीं ,
बहुत कुछ शेष रह जाता है।


आज बस इतना ही.................... 
#रोहित /२४. ०३. २०१४ 

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

प्रतिबिम्ब !!!

चित्र : सिर्फ सांकेतिक,गूगल से साभार।  


ये जो मैं हूँ,
क्या ये मैं ही हूँ ?
नहीं अब मैं बचा ही कहाँ हूँ ,
अब तो तुम भी हो !

तुमसे इतर,
मैं था भी तो क्या था ?
जो तुम हो,
तो मैं हूँ ! 

तुम्हारे होने से ,
मेरा होना है ,
तुम्हारे न होने से,
मेरा होना भी क्या है! 

सुनो, 
ये जो मैं हूँ ,
तुुम्हारा ही, 
प्रतिबिम्ब हूँ! 

जो तुम हो ,
वही मैं हूँ,
जो तुमसे अलग हूँ ,
कुछ भी तो नहीं हूँ!


बड़े दिनों बाद कुछ लिखने का मन हुआ, जो बन पड़ा वो यही है। अच्छा बुरा जो भी हो तुम्हारा ही है। 
# रोहित / १४. ०३. २०१४ 

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