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चित्र:गूगल से साभार |
लाख चाहता हूँ ,
शब्दो से तुम्हे,
पूरा का पूरा,
समेट लूँ।
वही नैन-नक्श ,
प्यारी सी मुस्कान ,
शब्द भी चुन लूँ ऐसे,
जो बया कर जाय तेरा ही अक्स।
तुम्हारी मासूमियत ,
तुम्हारा बावलापन ,
लाख चाहूँ कुछ लिख जाऊँ ऐसा ,
कि हो सके तुम्हारी इबादत।
जितना भी चाहूँ तुम्हे शब्दों में समेटना,
ऐसा ही कहाँ हो पाता है,
थोड़ा नहीं ,
बहुत कुछ शेष रह जाता है।
आज बस इतना ही....................
#रोहित /२४. ०३. २०१४